पुत्र की दीर्घायु एवं उज्जवल भविष्य एवम इच्छा पूर्ति हेतु यह व्रत पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है।
व्रती महिलाए प्रातः काल से ही इस व्रत की तैयारी में जुट जाती है।
बिना हल चले भूमि पर व्रती महिलाओ को चलना रहता है।
महुवा पत्ता एवं महुवा फल और पसहर चावल का भोग लगाया जाता है।
उक्त आयोजन नर्मदेश्वर शिव मंदिर प्रांगण में पंडित कृष्णा द्विवेदी के द्वारा विधि विधानपूर्वक संपन्न कराया गया ll
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