नमस्ते कोरबा :- भगवान भोले को सावन का महीना अति प्रिय है, एवं भक्तजन भी हर संभव उपाय कर भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए प्रयासरत रहते हैं,कोरबा जिले में कई ऐसे प्राचीन मंदिर है जो अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए हैं, कुछ अंधविश्वासी लोगों के द्वारा इन मंदिरों को समय-समय पर नुकसान भी पहुंचाया जा सकता हैइसका उदाहरण हमें देखने मिला कोरबा जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर थाना करतला अंतर्गत ग्राम ढोंगदरहा में एक अजीब और आश्चर्यजनक तस्वीरें देखने को मिली है,
दरअसल ग्राम ढोंगदरहा मैं तीन मोहल्लों के बीच एक पीपल पेड़ के नीचे मंदिर में शिवलिंग स्थापित था जिस पर ग्रामीणों द्वारा प्रत्येक मंगलवार को पूजा अर्चना किया जाता था और सावन का महीना लगते ही उस मंदिर के रंग रोगन का काम होने ही वाला था कि कुछ असामाजिक तत्वों ने मंदिर को तहस-नहस कर दिया, मंदिर के भीतर जहां शिवलिंग स्थापित था उस जगह को पूर्ण रूप से खोदकर गड़े हुए धन खोजने की कोशिश की गई है ऐसा गांव के लोगों का कहना है,
गांव से निकली जानकारी की सच्चाई जानने के लिए नमस्ते कोरबा न्यूज़ टीम के रिपोर्टर रामकुमार यादव अपने कैमरामैन के साथ घटनास्थल पहुंचे और उन्होंने सच्चाई जानने के लिए गांव वालों से बात की गांव वालों ने बताया की मंजिल लगभग 60 साल पुराना है और यहां गांव वाले पूजा पाठ करते हैं सावन में इस मंदिर को विशेष रूप से पूजा जाता है, गांव वालों ने मंदिर में खजाना होने की बात पर अनभिज्ञता जाहिर की गांव के सरपंच मालिकराम से पूछने पर उन्होंने कहा कि मंदिर काफी पुराना है, कुछ लोगों के द्वारा मंदिर में गड़े हुए धन के नाम पर परिसर को काफी नुकसान पहुंचाया गया है जिसकी जानकारी करतला थाने में देने की बात कह रहे हैं,









