कोरबा में बढ़ रहा है प्रदूषण का ग्राफ पर्यावरण संरक्षण मंडल केवल नोटिस देने में व्यस्त

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: राखड़ से हो रहा सर्वाधिक प्रदूषण
शहर में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण राखड़ है। संयंत्रों व राखड़ डेम के आसपास की आबोहवा इससे खासी प्रभावित हो रही है। इसका खामियाजा शहरी क्षेत्र के ही लोगों को सबसे अधिक उठाना पड़ रहा है। शहर से लगे संयंत्र व राखड़ डेम होने के कारण शहर में राखड़ उड़ता है खास करके ठंड के मौसम में हवा में आद्रता बढ़ने से संयंत्रों की चिमनी से निकलने वाली राखड़ शहर के बीचोबीच ही गिरती है बालको परसाभाठा, चेकपोस्ट, आइटीआई, सीएसईबी कॉलोनी, पथर्रीपारा सहित दीपका व कुसमुंडा में खदान व कोल साइडिंग की ओर सबसे अधिक प्रदूषण सामने आ रहा है पूरी दुनिया में कोविड-19 (COVID-19) से ज्यादा मौतें वायु प्रदूषण (Air Pollution) वजह से हो रही हैं. आपकी जानकारी में या परिवार में भी शायद कुछ लोग ऐसे होंगे जिन्हें हार्ट अटैक, डायबिटीज, लंग कैंसर या फिर फेफड़ों की कोई गंभीर बीमारी हुई होगी और डॉक्टरों ने भी इन बीमारियों का इलाज किया होगा. लेकिन शायद ही किसी डॉक्टर ने मरीज से ये कहा हो कि आपको एयर पॉल्यूशन यानी वायु प्रदूषण नाम की बीमारी हुई है. आपको ये तो बता दिया जाता है कि आप हृदय रोग के मरीज हैं या आपको अस्थमा हो गया है. लेकिन ये कोई नहीं बताता कि ये इसलिए हुआ है क्योंकि आप दिल्ली या ऐसे ही किसी और शहर में रहते हैं. जहां वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा है. अमेरिका के हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट की ग्लोबल एयर 2020 रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019 में वायु प्रदूषण के कारण दुनिया के 67 लाख लोगों की जान चली गई. इनमें से आधी मौतें अकेले चीन और भारत में हुई हैं. हालांकि कोविड-19 के संक्रमण से अब तक पूरे विश्व में 11 लाख से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई है यानी कोरोना वायरस से कहीं ज्यादा मौत प्रदूषण से हो रही हैं. लेकिन कोई इसकी बात नहीं करता है.
: कोरबा में वायु प्रदूषण की समस्या लगातार मजबूत स्थिति में होती जा रही है। बिजली घरों के धुएं के अलावा कोयला परिवहन के दौरान उत्पन्न होने वाली स्थिति खास तौर पर जिम्मेदार मानी जा रही है। जल, वायु और ध्वनी प्रदूषण की बढ़ोत्तरी में ये कारक अपनी खास भूमिका निभा रहे हैं। बार-बार शिकायत मिलने पर भी पर्यावरण संरक्षण मंडल नोटिस देने और कोरबा में प्रदूषण की स्थिति को मानक के अनुरूप बताने तक ही सीमित है। ऐसे में उसकी मंशा पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।: कोरबा में प्रदूषण का असल कारण यहां के पॉवर प्लांट से निकलने वाला राख है। ताजा जानकारी के मुताबिक 14 पॉवर प्लांट से प्रतिदिन 50 हजार टन राख उत्सर्जित होता है। यह राख धुएं में मिलकर वायु को प्रदूषित कर रहा है। जनजीवन पर यह तेजी से बुरा असर डाल रहा है। कोयला आधारित पॉवर प्लांट में प्रदूषण रोकने किए गए सभी उपाय भीकोरबा में 14 पॉवर प्लांट है। प्रतिदिन यह छह हजार मेगावाट बिजली उत्पन्न करता है। एक लाख टन कोयले की खपत होती है। इसका 50 फीसदी हिस्सा यानी 50 हजार टन कोयला राख बनकर निकलता है। यह राख धुएं में मिलकर वायु के कण में शामिल हो रही है। मानव जीवन के लिए यह जहर है। इतना ही नहीं कोरबा में पांच ओपन कास्ट कोयला खदान है। आठ अंडर ग्राउंड खदान है। प्रदूषण को बढ़ाने में यह काफी है। कोरबा में वायु प्रदूषण की स्थिति को नहीं सुधारा गया तो यहां जीवन यापन करना मुश्किल हो जाएगा

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