*एसईसीएल हेलीपैड के पास बेजा कब्जा धारियों के हौसले बुलंद,नगर निगम केवल नोटिस देने में व्यस्त*

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नमस्ते कोरबा :-: प्रबल इच्छा शक्ति और साहस होने पर आप कुछ भी कर सकते हैं कोरबा के मामले में यहां सब बिल्कुल आसान हो गया है, जहां नजर जाएगी वहां अतिक्रमण कारी नजर आएंगे एसईसीएल के ऑक्सीजन जोन पर हो रहे बेजा कब्जा में नगर निगम एवं राजस्व विभाग के ढीलेपन का फायदा भरपूर उठाया जा रहा है, हमारे द्वारा पहली बार खबर प्रकाशित करने पर वहां लगभग 10 लोगों के द्वारा कब्जा किया गया था जो आज दिनांक में 1000 के आस पास हो गए हैं आखिर ऐसा क्या कारण कि प्रशासन ऐसे बेजा कब्जा धारियों को नहीं हटाना चाह रहा, एसईसीएल के ऑक्सीजन क्षेत्र के लगभग 2 किलोमीटर के दायरे को बेजा कब्जा धारियों ने अपने स्वामित्व में ले लिया है नगर निगम के द्वारा केवल नोटिस थमा कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली जा रही है ऐसा नहीं है कि निगम के द्वारा इन्हें हटाने की पहल ना की गई हो लेकिन यह फिर से आकर बस गए

निगम द्वारा बनाए गए डंपिंग यार्ड मैं भी बेजा कब्जा धारियों की नजर

जब नगर निगम के अधिकारियों ने प्रशासन के साथ इन्हें हटाने की कोशिश की तो काफी विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी तब प्रशासन के द्वारा कार्यवाही स्थगित कर दी गई जिसका भरपूर फायदा उठाया जा रहा है,

वर्तमान में एसईसीएल हेलीपेड के पीछे से लेकर मुड़ापार प्लांटेशन में जमीन हड़पने के लिए माफिया और उनके सहयोगी खेल करने में जुटे हुए हैं। इनसे निपटने में अफसरों को पसीना छूट रहा है।कुछ मौकों पर जागरूक लोगों की आपत्ति और विरोध को देखते हुए स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और एसईसीएल के सुरक्षा अमले ने यहां पर अतिक्रमण हटाने की कवायद की और संबंधित लोगों को संदेश देने का काम किया कि इस तरह का खेला सफल नहीं होने दिया जाएगा। बार-बार तोडफ़ोड़ की कार्रवाई के बाद भी जमीन को घेरने का काम यहां पर चल रहा है। इस काम में अप्रवासी से लेकर आसपास के लोग खासे सक्रिय हैं। ऐसे लोगों को बता दिया गया है कि जो भी सरकारी जमीन शहर में खाली पड़ी है उस पर काबिज होने के लिए इन्हें वरदान मिला हुआ है और ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता। शहर में कई ऐसे इलाके उदाहरण के तौर पर मौजूद हैं जहां की खाली जमीन लोगों द्वारा आसानी से हथियाई जा चुकी है और इनकी सौदेबाजी की जा रही है। हेलीपेड के पीछे विकसित किये गए ग्रीन बेल्ट को तहस-नहस करने के साथ यहां पर उजाडऩे का काम अतिक्रमणकर्ता कर रहे हैं। अब तक की स्थिति में हजारों की संख्या में वृक्षों को साफ करने के साथ मौके से पार कर दिया गया है। इस तरफ न तो एसईसीएल कुछ कर सका और न ही वन विभाग। पर्यावरण को लेकर हाय-तौबा मचाने वाले कई संगठन और चेहरे इस तस्वीर से गायब हैं। यह बात समझ से परे है कि ऐसे मामलों में उनके सरोकार प्रदर्शित क्यों नहीं हो रहे हैं।

वार्ड पार्षद की सक्रियता भी नहीं आ रही काम :-: वार्ड क्रमांक 25 के पार्षद शैलेंद्र सिंह के द्वारा लगातार इस मामले को प्रशासन के सामने रखा जा रहा है लेकिन उनकी सक्रियताा भी इस अतिक्रमण को रोकने में विफल हो चुकी है, कुछ दिन पूर्व पार्षद के द्वारा आमरण अनशन की घोषणा की गई थी, जो राजस्व विभाग और वकीलोंं के आंदोलन के चलते स्थगित कर दी गई, पार्षद के द्वारा बतायाा गया अतिक्रमण दल के द्वारा संबंधित व्यक्तियोंं को नोटिस जारी की गई है, अब आगेे देखना केेेेे नगर निगम व जिला प्रशासन इस पर किस प्रकार कार्रवाई करती हैं, उन्होंने यह भी कहा कि अगर उचित कार्रवाई नहीं होती तो वह अपना अनशन बहुत जल्द्द करेंगे,

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