“ना सड़क, ना पानी, ना स्कूल आमपानी में ‘विकास’ सिर्फ जुमला!” देखिए यह खास खबर
नमस्ते कोरबा :- कागजों में दौड़ता विकास और जमीनी हकीकत में तड़पता गांव यह विरोधाभास पोंडी उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम पंचायत मानिकपुर के आश्रित गांव आमपानी में साफ नजर आता है।
जिला प्रशासन भले ही विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन पोंडी उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम पंचायत मानिकपुर के आश्रित गांव आमपानी की तस्वीरें इन दावों की पोल खोल रही हैं। आजादी के इतने वर्षों बाद भी यहां करीब 120 परिवार सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।
पहाड़ी पर बसे इस गांव तक पहुंचने के लिए आज तक सड़क नहीं बन सकी है। ग्रामीणों को रोजाना उबड़-खाबड़ और जंगल के खतरनाक रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। यह स्थिति न सिर्फ असुविधाजनक है, बल्कि आपात स्थिति में जानलेवा भी साबित हो सकती है।
सबसे बड़ी समस्या पानी की है। गांव में एक भी बोरवेल नहीं है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे रोजाना डेढ़ किलोमीटर दूर ढोंडी से पानी लाने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी में यह परेशानी और विकराल रूप ले लेती है। सवाल उठता है कि “हर घर जल” जैसे दावे आखिर इन इलाकों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहे?
बिजली की बात करें तो गांव आज भी अंधेरे में जीने को मजबूर है। सोलर प्लेट के सहारे कुछ समय के लिए रोशनी जरूर मिलती है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। वहीं शिक्षा के नाम पर गांव में न स्कूल है, न आंगनबाड़ी जिससे बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि चुनाव के समय गांव में पहुंचकर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्याएं भी फाइलों में दफन हो जाती हैं। कई बार प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
यह स्थिति केवल एक गांव की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता को उजागर करती है, जहां योजनाएं कागजों में चलती हैं और जमीनी स्तर पर दम तोड़ देती हैं। जब आकांक्षी क्षेत्रों के गांव ही बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, तो विकास के दावे महज दिखावा बनकर रह जाते हैं।
अब वक्त है कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि जमीनी हकीकत को समझें और कागजी योजनाओं से आगे बढ़कर वास्तविक काम करें। आमपानी जैसे गांवों तक सड़क, पानी, बिजली और शिक्षा पहुंचाना केवल वादा नहीं, जिम्मेदारी है।
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