6.78 लाख में उजड़ता जीवन,भिलाई खुर्द के ग्रामीणों का विस्थापन पर बड़ा विरोध, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को सौंपा सामूहिक ज्ञापन
नमस्ते कोरबा :- भिलाई खुर्द क्रमांक-1 से आज 50 से अधिक ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल पूर्व राजस्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल के निवास पर पहुंचा और खदान विस्तार योजना के तहत हो रहे विस्थापन को लेकर सामूहिक ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन द्वारा उन्हें न तो सम्मानजनक पुनर्वास दिया जा रहा है और न ही उचित मुआवजा, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है।

SECL पर वादाखिलाफी, सर्वे में धांधली और मूल निवासियों की उपेक्षा के गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने बताया कि खदान विस्तार के नाम पर वर्षों से बसे परिवारों को उजाड़ने की तैयारी की जा रही है, लेकिन इसके बदले जो मुआवजा और सुविधाएं दी जा रही हैं, वे नाकाफी और भेदभावपूर्ण हैं। उन्होंने इसे सीधे-सीधे CIL R&R Policy 2012, PMKKKY और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया।

6 डिसमिल जमीन का वादा, आज पूरी तरह भूला गया
ग्रामीणों ने कहा कि SECL प्रबंधन ने पूर्व में प्रत्येक विस्थापित परिवार को मानिकपुर स्थित GM ऑफिस के सामने उपलब्ध खाली भूमि से 6-6 डिसमिल जमीन देने का लिखित-मौखिक आश्वासन दिया था। आज विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होते ही प्रबंधन अपने इसी वादे से मुकर गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल वादाखिलाफी नहीं, बल्कि उनके साथ खुला धोखा है।
₹6.78 लाख का मुआवजा या ग्रामीणों के साथ मजाक?
जमीन के वादे से पीछे हटने के बाद अब प्रबंधन मात्र ₹3 लाख जमीन खरीदने के लिए और ₹3.78 लाख मकान निर्माण के लिए देने की बात कर रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि कोरबा जैसे शहर या उसके आसपास ₹3 लाख में 6 डिसमिल जमीन मिलना असंभव है। ऐसे में यह मुआवजा नहीं, बल्कि विस्थापितों के भविष्य के साथ क्रूर मजाक है। ग्रामीणों ने इसे “बेहतर जीवन स्तर” के सिद्धांत का सीधा उल्लंघन बताया।

सर्वे में धांधली का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन 2023 की स्थिति को कट-ऑफ मानकर सर्वे कर रहा है, जबकि 2024 में भी कई परिवारों ने बढ़ती जरूरतों के कारण निर्माण कराया है। चूंकि अधिग्रहण और भुगतान की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है, इसलिए सर्वेक्षण वर्तमान तिथि के अनुसार होना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी तारीख को आधार बनाकर सैकड़ों लोगों को जानबूझकर अपात्र ठहराने की साजिश रची जा रही है।
मूल निवासियों की अनदेखी, बाहरी रसूखदारों को लाभ
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के 50-60 मूल निवासी परिवार, जो पीढ़ियों से वहां रह रहे हैं, उन्हें पात्रता सूची से बाहर कर दिया गया है। वहीं, हाल ही में जमीन खरीदने वाले बाहरी और रसूखदार लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीणों ने इसे गंभीर अन्याय बताते हुए कहा कि यह समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन है।
DMF फंड पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने कहा कि कोरबा देश के सबसे समृद्ध DMF जिलों में से एक है। नियमों के अनुसार इस फंड का पहला उपयोग खनन प्रभावितों के पुनर्वास में होना चाहिए, लेकिन भिलाई खुर्द के विस्थापितों को इससे कोई ठोस सहायता नहीं दी जा रही। उन्होंने मांग की कि DMF फंड से अतिरिक्त सहायता देकर सम्मानजनक विस्थापन सुनिश्चित किया जाए।
जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी
ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक और उद्योग मंत्री पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अपनी पीड़ा लेकर जब वे उनके पास पहुंचे, तो उन्हें संवेदनशीलता से सुनने के बजाय अपमानित कर भगा दिया गया। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।
जयसिंह अग्रवाल ने दिया समर्थन
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने ग्रामीणों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और उन्हें आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को जनहित का विषय बनाकर हर मंच पर उठाएंगे। उन्होंने कहा कि विस्थापन केवल जमीन छीनना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन और भविष्य से जुड़ा प्रश्न है, और इसमें किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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