Monday, February 16, 2026

क्या शहर की शांति से ज़्यादा ज़रूरी है शराब की दुकान? मंत्री जी! शराब दुकान तो हटवा दीजिए,शहर में आए दिन हो रहा विवाद

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क्या शहर की शांति से ज़्यादा ज़रूरी है शराब की दुकान? मंत्री जी! शराब दुकान तो हटवा दीजिए,शहर में आए दिन हो रहा विवाद

नमस्ते कोरबा। कोरबा पुराना शहर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग में शॉपिंग कांप्लेक्स गीतांजलि भवन के सामने स्थित शराब दुकान खुलने के बाद से यहां की आम जनता खासकर महिलाओं, बच्चों और व्यापारी वर्ग के लिए मुसीबत हो गई है। शराब दुकान हटाने की मांग पिछले मार्च माह से की जा रही है, मंत्री लखन लाल देवांगन, महापौर, कलेक्टर को आवेदन देने कब बाद भी आज तक इस पर ध्यान नहीं दिया गया है। इस घोर उदासीनता का खमियाजा शहर के अमन पसंद लोग भुगत रहे हैं।

गलियां बन गई मूत्रालय और मदिरालय,शराब के अपशिष्ट भी फेंक रहे

यहां आने वाले शराबियों के द्वारा बीच सड़क मारपीट, हर रोज हो रहे हंगामा और गाली-गलौज तथा महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियों, छींटाकशी के कारण लोगों को शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। कोई गश्त दुकान के आसपास होती नहीं जिससे शांति व्यवस्था पर खतरा बना रहता है।

सिर्फ राजस्व बढ़ाने के चक्कर में जनता का सुख-चैन न छीनें सरकार

यहां का व्यापारी वर्ग काफी परेशान है तो काम करने आने वाली युवतियों व महिलाओं को काफी असहजता महसूस होती है। लोगों की लगातार मांग है कि यह शराब दुकान शहर से बाहर कहीं आउटर में खोलें, राजस्व वहां से भी मिलेगा।

इस इलाके में वार्ड 13 के पार्षद, वार्ड 6 के पार्षद व सभापति नूतन सिंह ठाकुर, सांसद प्रतिनिधि सुनील जैन का भी निवास है और लोगों की अपेक्षाएं व उम्मीद इनसे है कि अमन पसंद जनता और व्यापारियों की इस ज्वलंत समस्या का समाधान कराएं। सरल और सहज विधायक लखन लाल देवांगन आबकारी मंत्री भी हैं और महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत भी बेहतर वाकिफ हैं।

करते हैं हुज्जतबाजी,कितने मामलों में थाना जाएं लोग

शराबी सड़क पर आपस में ही उलझ कर गाली गलौच, विवाद मारपीट करते रहते हैं। कई शराबी तो शराब खरीदने के बाद गौरीशंकर मन्दिर के पीछे, मधु स्वीट्स की गली में ही जाकर पीना शुरू कर देते हैं। इनके लिए दोनों गलियां मदिरालय और मूत्रालय बनी हुई हैं, मना करने गाली-गलौच व हुज्जतबाजी करते हैं। लोग बात-बात पर न तो पुलिस को बुला सकते हैं और फिर कितनी बातों को लेकर लोग थाना जाएं,यह भी सवाल है। पुलिस की गश्त चारपहिया वाहन में फर्राटे से अपने समय में होती है, पैदल और बाइक गश्त के दिन लद चुके हैं,संवेदनशील व भीड़ भाड़ वाले इलाकों में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी भी अब पहले जैसी नहीं रह गई कि जनता सुरक्षित महसूस करे। अक्सर हालात ऐसे हैं कि खुद ही लड़ो-जुझो और फिर थाना का चक्कर काटो, और इधर सरकारी अधिकारी शराब दुकान से सरकार को मिल रहे राजस्व की आड़ में अपना हाथ खड़ा किए हुए हैं।

यातायात की भी गम्भीर समस्या

अक्सर नशा की हालत में व सामान्य हालत में भी शराब खरीदने आने वाले लोग बीच सड़क तक दुपहिया, चार पहिया वाहन खड़ी कर देते हैं जिससे आवागमन तो बाधित होता है,मना करने व समझाने पर विवाद करते हैं।

शासन-प्रशासन को लिखा पत्र रद्दी की टोकरी में…!

इन्हीं समस्याओं को लेकर मध्यनगरी व्यापारी संघ ने पूर्व में छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री, पुलिस अधीक्षक कोरबा, आबकारी आयुक्त एवं नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर उक्त शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है। संबंधित पत्र के माध्यम से व्यापारियों ने लिखा है कि व्यापारियों का व्यापार भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।

यहां कभी भी अप्रिय स्थिति निर्मित होने का डर व्यापारियों में बना रहता है।व्यापारियों के समर्थन में चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने भी शासन- प्रशासन से निवेदन किया है कि उक्त शराब दुकान को शहर क्षेत्र से अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए। पत्र शायद रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है,इसलिए समस्या यथावत है।

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