परंपरा से प्रगति की ओर: कोरबा के किसान ने गुलाब से रचा सफलता का नया गुलदस्ता
नमस्ते कोरबा :- जहाँ एक ओर किसान पारंपरिक खेती में लागत और मुनाफे के बीच जूझ रहे हैं, वहीं कोरबा जिले के कुमगरी गांव के किसान जयकुमार ने खेती की तस्वीर ही बदल दी है। परंपरागत फसलों को अलविदा कहकर उन्होंने डच रोज (गुलाब) की आधुनिक खेती शुरू की और आज हर महीने 50 से 60 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।
फरवरी का महीना आते ही गुलाब की मांग अपने चरम पर होती है चाहे वेलेंटाइन डे, रोज डे, शादी-ब्याह या विशेष आयोजनों की सजावट हो। अब तक छत्तीसगढ़ में गुलाब की आपूर्ति दूसरे राज्यों पर निर्भर थी, लेकिन जयकुमार की पहल ने कोरबा को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा दिया है। आज कोरबा शहर के फूल बाजार में लाल, पीले और सफेद गुलाब की आपूर्ति सीधे कुमगरी से हो रही है।
पॉलीहाउस में उगता मुनाफा
जयकुमार द्वारा उगाया जा रहा गुलाब डच रोज है,जो व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी किस्म मानी जाती है। इसकी खेती सब्जियों की तरह की जाती है, लेकिन इसे सीधे सूर्य प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती। खेत में चारों ओर से झिल्लीदार पॉलीहाउस बनाकर भीतर नियंत्रित वातावरण में पौधों को तैयार किया जाता है।
करीब 2600 वर्ग मीटर क्षेत्र में पॉलीहाउस तैयार करने पर लगभग 40 लाख रुपये की लागत आई, जिसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी शासन की ओर से निर्धारित है। नियमित खाद, पानी और कीट नियंत्रण के जरिए तैयार होने वाले गुलाब आकार में बड़े और गुणवत्ता में उत्कृष्ट होते हैं, जिससे बाजार में उन्हें बेहतर कीमत मिलती है।
एक सीजन में 10 लाख तक की आमदनी
जयकुमार बताते हैं कि गुलाब की मांग पूरे साल बनी रहती है। एक सीजन में उनकी आमदनी 10 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। हाल ही में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की टीम भी उनके खेत पहुंची और गुलाब की खेती को और उन्नत करने के लिए मार्गदर्शन दिया।
किसानों के लिए प्रेरणा
जयकुमार की सफलता ने इलाके के अन्य किसानों में भी नई उम्मीद जगाई है। कई किसान अब फूलों की व्यावसायिक खेती की ओर रुख करने की इच्छा जता रहे हैं। यह उदाहरण साबित करता है कि तकनीक, सरकारी सहयोग और नवाचार से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।








