विकास या विस्थापन? भिलाईखुर्द में सरकार की नीति पर सवाल,एसईसीएल की मनमानी पर जयसिंह अग्रवाल का हस्तक्षेप
नमस्ते कोरबा :- मानिकपुर माइंस विस्तार परियोजना के तहत एसईसीएल प्रबंधन द्वारा अपनाई जा रही पुनर्वास एवं मुआवजा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भिलाईखुर्द क्रमांक–1 के सैकड़ों ग्रामीणों के साथ हो रहे कथित अन्याय के खिलाफ पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है।

दो दिन पूर्व ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि एसईसीएल प्रबंधन वर्ष 2023 के पुराने सर्वे को आधार बनाकर मकानों और परिवारों की गणना कर रहा है, जबकि उसके बाद अनेक परिवारों द्वारा वैध रूप से मकानों का निर्माण, विस्तार एवं नवीनीकरण किया गया है। पुराने आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन कर सैकड़ों वास्तविक पात्र परिवारों को पुनर्वास और मुआवजा से वंचित किया जा रहा है।
ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए श्री अग्रवाल ने तत्काल केंद्रीय कोयला मंत्री को पत्र लिखकर एसईसीएल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मांग की कि पुनर्वास नीति को वर्तमान जमीनी स्थिति के अनुसार, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए।
इसके पश्चात जयसिंह अग्रवाल स्वयं भिलाईखुर्द गांव पहुंचे, जहां 300 से अधिक ग्रामीणों की मौजूदगी में जनसभा आयोजित हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि एसईसीएल की मनमानी नहीं रुकी, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
सभा को संबोधित करते हुए जयसिंह अग्रवाल ने कहा “विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पुनर्वास कोई दया नहीं, बल्कि प्रभावितों का संवैधानिक अधिकार है। यदि अन्याय नहीं रुका, तो यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि पुराने सर्वे के आधार पर फैसला लेना पूरी तरह असंवैधानिक और अमानवीय है। वर्तमान में वास्तविक रूप से प्रभावित प्रत्येक परिवार को पुनर्वास और मुआवजा मिलना ही चाहिए। जयसिंह अग्रवाल ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे हर मंच और हर संघर्ष में उनके साथ खड़े रहेंगे और किसी भी कीमत पर उनके अधिकारों से समझौता नहीं होने देंगे।ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि जयसिंह अग्रवाल का साथ मिलने से उन्हें न्याय की लड़ाई में नया साहस और भरोसा मिला है।
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