अपना घर सेवा आश्रम बना सहारा: दार्जिलिंग से भटके युवक को कोरबा में मिलाया परिवार से
नमस्ते कोरबा :- दार्जिलिंग की वादियों से निकला एक युवक जब काम की तलाश में घर से चला था, तब परिवार को उम्मीद थी कि कुछ महीनों में हालात सुधरेंगे। लेकिन वक्त बीतता गया, खबर नहीं आई… और एक दिन उम्मीद डर में बदल गई।
दार्जिलिंग निवासी प्रवीण भौमिक 19 जून 2025 को रोजगार की तलाश में अपने घर से निकले थे। हालात ऐसे बने कि वे देश के अलग-अलग शहरों में भटकते रहे। मानसिक स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई और अंततः वे छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में आ पहुंचे बिल्कुल अकेले,थके हुए और बेसहारा।
कटघोरा पुलिस की नजर जब इस युवक पर पड़ी तो उनकी असहाय स्थिति साफ दिखाई दे रही थी। मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए पुलिस ने उन्हें “अपना घर सेवा आश्रम, कोरबा” पहुंचाया। आश्रम में प्रवीण की देखभाल की गई, उन्हें सुरक्षित माहौल और सहारा मिला। इसी दौरान उनके कपड़ों में रखे एक कागज़ पर घर का मोबाइल नंबर मिला—और यहीं से उम्मीद की किरण फूटी।
आश्रम के सदस्यों ने तुरंत परिवार से संपर्क किया। दूसरी ओर, दार्जिलिंग में लगभग एक साल से परेशान परिवार के लिए यह फोन किसी चमत्कार से कम नहीं था। कुछ ही औपचारिकताओं के बाद प्रवीण को सकुशल उनके घर वापस भेजा गया।
युवक के भाई ने भावुक होकर कहा,
“पिछले एक साल से हम हर दिन डर और उम्मीद के बीच जी रहे थे। आज अपना घर सेवा आश्रम और पुलिस प्रशासन की वजह से हमारा भाई हमें वापस मिल सका। हम जिंदगी भर इनके आभारी रहेंगे।”
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