त्याग तपस्या और हौसले की मिसाल,साइकिल से 7 राज्यों की यात्रा पूरी कर कोरबा पहुँचे मध्यप्रदेश के जितेंद्र झा
नमस्ते कोरबा : कभी आपने सोचा है कि कोई व्यक्ति अकेले ही देश के एक छोर से दूसरे छोर तक सिर्फ समाज को जागरूक करने के लिए यात्रा पर निकले? मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले जितेंद्र झा ऐसा ही कर रहे हैं। वे अब तक सात राज्यों की यात्रा पूरी कर चुके हैं और छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में पहुंचे। अब उनका अगला पड़ाव अंबिकापुर, फिर पश्चिम बंगाल, उसके बाद अरुणाचल प्रदेश और अंततः दक्षिण भारत होगा।
जितेंद्र झा ने अपनी यात्रा की शुरुआत पैदल की थी। कठिन परिस्थितियों में भी वे चलते रहे और अब तक करीब 1200 किलोमीटर पैदल सफर तय कर चुके हैं। उनकी निष्ठा और तपस्या देखकर लोगों ने उनका हौसला बढ़ाया। इसी दौरान उन्हें एक साइकिल उपहार स्वरूप मिली, जिसके बाद से वे साइकिल पर अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं।
जितेंद्र झा का मानना है कि “प्रकृति हमें बहुत कुछ देती है, लेकिन बदले में हमसे कुछ नहीं मांगती। अगर हम प्रगति की रक्षा नहीं करेंगे तो जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा। इसलिए आज के समय में प्रकृति और प्रगति की रक्षा करना अनिवार्यता बन गया है।” उनका यह स्पष्ट संदेश है कि विकास केवल भौतिक साधनों से नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और जिम्मेदारी से भी जुड़ा है।
जितेंद्र की जीवनशैली भी उनके संदेश जितनी ही प्रेरणादायक है। वे इस पूरी यात्रा में अकेले हैं, किसी संगठन या दल के सहयोग के बिना। वे दिन में सिर्फ एक बार भोजन करते हैं, और बाकी समय तपस्या और अपने मिशन के लिए समर्पित रहते हैं। उनका यह त्याग, साहस और अनुशासन उन्हें अलग पहचान देता है।
आज की भागदौड़ और आरामतलब जिंदगी के बीच जितेंद्र झा का संकल्प युवाओं और समाज के लिए एक बड़ी सीख है। वे बताते हैं कि यह यात्रा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज को जागरूक करने के लिए है। उनका जीवन और अभियान यह संदेश देता है कि यदि व्यक्ति ठान ले तो अकेले भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है।