*छत्तीसगढ़ के सत्ता संघर्ष में दो की लड़ाई में हो सकता है तीसरे का फायदा*

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नमस्ते कोरबा :-: उल्लेखनीय है कि जुलाई माह से छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद को लेकर जो अटकलों का दौर शुरु हुआ वह अब तक जारी है। इस अधर वाली स्थिति ने न सिर्फ प्रदेश के दिग्गज कांग्रेस नेताओं अपितु छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक वर्ग में भी भ्रम की स्थिति बना रखी है। इस भ्रम ने छत्तीसगढ़ की व्यवस्था को ठप्प कर रखा है

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद को लेकर मचे घमासान के बीच खबर आ रही है कि नवरात्रि में यहां सत्ता परिवर्तन हो सकता है। ढाई- ढाई साल के फार्मूले पर अमल में कठिनाई होने पर पंजाब की तरह कोई तीसरा विकल्प भी तलाशा जा सकता है।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के लगभग 45 विधायक इस समय दिल्ली में मौजूद है। इनकी अगवाई आदिवासी नेता और विधायक वृहस्पत सिंह कर रहे हैं। हालांकि इनमें से कोई भी विधायक खुले तौर पर कुछ नहीं बोल रहा है, लेकिन संकेत यही मिल रहे हैं कि ये सभी नेता मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समर्थन में दबाव बनाने दिल्ली आए हैं। इन्हें कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी पी. एल. पुनिया से मुलाक़ात का इंतज़ार है, ताकि पूरी दमदारी के साथ वे अपनी यह बात रख सकें। इनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में किसी तरह के कोई परिवर्तन की ज़रूरत नहीं है।

इस बीच खबर आ रही है कि भूपेश बघेल और टी एस सिंहदेव के बीच शीत युद्ध की संभावना के मद्देनजर छत्तीसगढ़ में भी पंजाब का फार्मूला लागू किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में बड़ा सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ का “चन्नी” कौन होगा? इस सवाल के जवाब में कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ पर फैसला राहुल गांधी को लेना है। छत्तीसगढ़ में उनके सबसे करीबी कांग्रेस नेता विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत हैं। डॉ महंत का प्रदेश के सभी नेताओं से मधुर सम्बन्ध है। एक ओर उनको मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपना बड़ा भाई मानते हैं, वहीं स्वास्थ मंत्री टी एस सिंहदेव से उनकी निकट जग जाहिर है। ऐसे में पंजाब के दोहराव से बचने के लिए राहुल गांधी बीच का रास्ता निकाल सकते हैं।

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