“CPCB की अनुमति के बिना लोतलोता में पाइपलाइन कैसे बिछाई जा रही है? जयसिंह अग्रवाल ने ADM और CE-CSEB से की चर्चा”

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“CPCB की अनुमति के बिना लोतलोता में पाइपलाइन कैसे बिछाई जा रही है? जयसिंह अग्रवाल ने ADM और CE-CSEB से की चर्चा”

नमस्ते कोरबा। ग्राम लोतलोता स्थित राखड़ बांध को पुनः संचालित किए जाने की तैयारियों को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। ग्रामीणों द्वारा बांध की जर्जर स्थिति, पूर्व में तटबंध टूटने से खेतों एवं आसपास के क्षेत्रों में राखड़ पहुंचने तथा अब पुनः पाइपलाइन बिछाकर राखड़ भंडारण की तैयारी किए जाने की जानकारी दिए जाने के बाद उन्होंने पूरे मामले को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

जयसिंह अग्रवाल ने इस संबंध में ADM कोरबा तथा CE-CSEB दर्री से मोबाइल पर चर्चा कर लोतलोता राखड़ बांध की वर्तमान स्थिति और वहां चल रही गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े इस विषय में पर्यावरणीय एवं सुरक्षा संबंधी सभी शर्तों का पालन सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।

ADM एवं CE-CSEB दर्री से फोन पर की चर्चा, ग्रामीणों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग

उन्होंने कहा कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा 23 जून 2026 को लोतलोता राखड़ बांध के Pond-A के 22 हेक्टेयर क्षेत्र के अस्थायी उपयोग की अनुमति सशर्त रूप से दी गई है। अनुमति की शर्त क्रमांक 3 में स्पष्ट किया गया है कि इसके लिए CPCB की सहमति अनिवार्य है तथा CPCB की सहमति प्राप्त नहीं होने पर मंडल की अस्थायी अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।

ऐसे में ग्रामीणों द्वारा यह जानकारी दिया जाना कि CPCB की सहमति प्राप्त होने से पहले ही लोतलोता राखड़ बांध तक नई पाइपलाइन बिछाने एवं बांध की जल निकासी व्यवस्था को पुनः खोलने की तैयारी की जा रही है, गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि जब CPCB की सहमति स्वयं पर्यावरण संरक्षण मंडल की अनुमति की अनिवार्य शर्त है, तो उसकी सहमति प्राप्त होने से पहले पाइपलाइन बिछाने एवं बांध को पुनः उपयोग में लाने की तैयारी किस अनुमति के आधार पर की जा रही है, यह जिला प्रशासन को तत्काल स्पष्ट करना चाहिए।

उन्होंने कलेक्टर को भेजे पत्र में मांग की है कि CPCB की सहमति की स्थिति तत्काल स्पष्ट कराई जाए और जब तक आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति एवं सुरक्षा परीक्षण पूरे नहीं हो जाते, तब तक पाइपलाइन बिछाने अथवा राखड़ भंडारण से संबंधित गतिविधियों को आगे न बढ़ाया जाए।

पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि लोतलोता के ग्रामीणों की चिंता को केवल विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बांध के आसपास गांव, कृषि भूमि और विद्यालय स्थित हैं तथा पूर्व में राखड़ एवं पानी के फैलाव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अप्रैल 2026 में झाबू राखड़ बांध की दुर्घटना के बाद ग्रामीणों की आशंकाओं को और अधिक गंभीरता से लेना आवश्यक है।

उन्होंने मांग की कि लोतलोता राखड़ बांध की संरचनात्मक मजबूती, तटबंध, स्लोप स्टेबिलिटी, जल निकासी एवं अन्य सुरक्षा मानकों की स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था से जांच कराई जाए। साथ ही पूर्व में राखड़ से प्रभावित किसानों एवं ग्रामीणों की क्षति का आकलन कर उनकी लंबित मांगों पर जिला प्रशासन, CSPGCL एवं संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक आयोजित कर समयबद्ध समाधान निकाला जाए।

जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि विद्युत उत्पादन की निरंतरता आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ग्रामीणों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और उनके अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए ग्रामीणों को विश्वास में लेकर संवेदनशील एवं त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

 

 

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