वेंटिलेटर की तलाश में 3 घंटे भटकते रहे परिजन, युवक की मौत, मेडिकल कॉलेज एवं निजी अस्पताल पर परिजनों ने लगाया आरोप

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वेंटिलेटर की तलाश में 3 घंटे भटकते रहे परिजन, युवक की मौत, मेडिकल कॉलेज एवं निजी अस्पताल पर परिजनों ने लगाया आरोप

नमस्ते कोरबा :- जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक गंभीर घटना सामने आई है. जहाँ इलाज के दौरान एक युवक की मौत हो गई है. परिजनों ने मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल के डॉक्टरों और निजी अस्पतालों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. मृतक के चाचा कैलाश दास द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, वेंटिलेटर और सही समय पर चिकित्सीय सहायता न मिलने के कारण युवक को कई अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े, जिससे आखिरकार उसकी एम्बुलेंस में ही मौत हो गई. मृतक के भाई ने इस पूरे मामले का एक वीडियो बना कर भी सोशल मीडिया में पोस्ट किया है. जिसकी शहर में जमकर चर्चा है.

मेडिकल कॉलेज अस्पताल की कैजुअल्टी में लापरवाही बरतने के कई लगातार मामले सामने आए हैं. इसके बावजूद भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा कार्रवाई नहीं की गई है. ताज़ा शिकायत पत्र के मुताबिक, कंचंदा (जांजगीर-चापा) निवासी 29 वर्षीय अरुण दास को 14 सितंबर 2026 को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

उपचार के दौरान 15 सितंबर को अचानक मरीज की स्थिति बिगड़ने लगी. परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल में न तो सोनोग्राफी हुई और न ही सीटी स्कैन की सुविधा मिल सकी. हालत गंभीर होने पर मरीज को श्वास नली की मशीन (वेंटिलेटर) पर रखा गया, लेकिन स्थिति में सुधार न होने पर परिजनों ने उसे किसी निजी अस्पताल में ले जाने का निर्णय लिया.

शिकायत के मुताबिक परिजनों ने ट्रांसपोर्ट नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल में फोन पर असपताल के प्रबंधक स्वप्निल झा से बात कर वेंटिलेटर की उपलब्धता की जानकारी ली थी. आरोप है कि अस्पताल की तरफ से मरीज को लाने की बात कही गई, जिसके बाद वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस का किराया कर मरीज को रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच शिवाय हॉस्पिटल पहुँचाया गया.

परंतु वहाँ पहुँचने पर डॉक्टरों ने वेंटिलेटर खाली न होने की बात कहकर मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया. इसके बाद एम्बुलेंस को पास के जैन हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर मौजूद नहीं थे. इसके बाद मरीज को कोसबाबड़ी स्थित एनकेएच हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन वहाँ भी मरीज को एडमिट नहीं कराया जा सका.

शिकायत के अनुसार इसी बीच जब शिवाय हॉस्पिटल में दोबारा फोन पर संपर्क किया गया तो यह बताया गया कि अब वेंटिलेटर मशीन खाली है और मरीज को वापस ले आएं. परिजन मरीज को लेकर दोबारा शिवाय हॉस्पिटल पहुँचे, जहाँ जाँच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिजनों का दर्द है कि लगभग 2 से 3 घंटे तक मरीज एम्बुलेंस में ही एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा. समय पर इलाज और वेंटिलेटर न मिलने से उसकी जान चली गई.

मृतक के अपने पीछे 6 महीने का पुत्र और पत्नी हैं. इस अनाथ बच्चे और बेसहारा पत्नी के लिए परिजनों ने शासन-प्रशासन से कड़े शब्दों में न्याय की गुहार लगाई है. मृतक के चाचा कैलाश दास ने मांग की है कि इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जाँच की जाए और अस्पताल प्रबंधन व संबंधित लापरवाह लोगों पर उचित कार्रवाई की जाए. ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह की अमानवीय स्थिति का सामना न करना पड़े.

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