संडे स्पेशल : स्कूल जाना है तो नदी पार करो… सिर्री के बच्चों की ये कैसी ‘विकास यात्रा’ देखिए इस खबर में

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संडे स्पेशल : स्कूल जाना है तो नदी पार करो… सिर्री के बच्चों की ये कैसी ‘विकास यात्रा’ देखिए इस खबर में

नमस्ते कोरबा :- जिले के दूरस्थ पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड की सिर्री पंचायत से सामने आई तस्वीर शिक्षा और विकास के दावों के बीच सिस्टम की हकीकत बयां कर रही है। यहां स्कूली बच्चों को बरसात के दिनों में स्कूल पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। जलस्तर बढ़ने पर हालात और गंभीर हो जाते हैं। कई बार माता-पिता खुद बच्चों को नदी पार करवाकर स्कूल पहुंचाते हैं। पानी अधिक होने पर बच्चों की पढ़ाई कई दिनों तक प्रभावित होती है।

यह स्थिति केवल बच्चों की शिक्षा तक सीमित नहीं है। नदी में पानी बढ़ते ही ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो जाती है। राशन लेने से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में नदी पार करना उनके लिए मजबूरी बन जाता है। सबसे ज्यादा चिंता छोटे बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर रहती है।

**किताबों से पहले नदी का सामना**

स्कूल जाने की उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और कंधों पर बस्ते होने चाहिए, लेकिन सिर्री में बरसात के दिनों में उन्हें स्कूल की राह में सबसे पहले नदी का सामना करना पड़ता है। जलस्तर सामान्य रहने पर किसी तरह आवाजाही हो जाती है लेकिन पानी बढ़ने के साथ खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में कई अभिभावक बच्चों को अकेले भेजने के बजाय खुद नदी पार करवाते हैं।

यह तस्वीर केवल एक गांव की परेशानी नहीं बल्कि उन दूरस्थ इलाकों की चुनौती को सामने लाती है जहां बुनियादी सुविधाओं की पहुंच अब भी अधूरी है। सरकार शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने की बात करती है, लेकिन यदि बच्चे सुरक्षित तरीके से स्कूल तक ही नहीं पहुंच पा रहे हैं तो शिक्षा की यह पहुंच कितनी प्रभावी है, यह बड़ा सवाल है।

**पुल की मांग वर्षों से, समाधान अब भी दूर**

ग्रामीणों के मुताबिक नदी पर पुल की मांग लंबे समय से की जा रही है। इस समस्या को लेकर क्षेत्रीय विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने भी पुल निर्माण की मांग उठाई है लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान यही समस्या दोहराती है। पानी बढ़ने के साथ बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की आवाजाही दोनों प्रभावित होते हैं।

*क्या हादसे के बाद जागेगा सिस्टम?**

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या व्यवस्था किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है? नदी पार करते समय यदि किसी बच्चे के साथ दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब सड़क, पुल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उन लोगों तक पहुंचें, जिन्हें उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

सिर्री की यह तस्वीर सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर भी दिखाती है। एक ओर शिक्षा को बच्चों के भविष्य की नींव माना जाता है वहीं दूसरी ओर उसी भविष्य तक पहुंचने के लिए बच्चों को जोखिम उठाना पड़ रहा है।

**सिर्फ पुल नहीं, बच्चों के भविष्य का सवाल**

सिर्री के ग्रामीण किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि बच्चों को स्कूल जाने के लिए सुरक्षित रास्ता मिले और बारिश के दिनों में गांव का संपर्क न टूटे। पुल बनने से केवल नदी पार करने की समस्या दूर नहीं होगी बल्कि बच्चों की पढ़ाई नियमित होगी, मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा और ग्रामीणों की रोजमर्रा की आवाजाही आसान होगी।

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