नेकी की दीवार पर लग गया ‘गंदगी’का अंबार,अब कैसे होगा गरीबों का उद्धार?

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नमस्ते कोरबा :- कोरबा के सभी वार्डों में नेकी की दीवार अच्छे काम के लिए शुरु की गई थी. यहां लोग ऐसे कपड़े देकर जाते थे जो गरीब भी पहन लेते थे. लेकिन अब आलम ये हो गया है कि लोग कुछ भी यहां फेंक जा रहे हैं और जो कपड़े पहनने लायक थे वो भी खराब हो रहे हैं.

इस दीवार का उद्देश्य था कि गरीब लोगों को कपड़े मिल सकें. लेकिन शर्त थी कि कपड़े साफ-सुथरे हों, लोग घरों में जो कपड़े इस्तेमाल नहीं करते थे. वो ऐसे कपड़ों को यहां पर रख कर चले जाते थे. जरूरतमंद लोग भी अपने हिसाब से कपड़े छांट कर पहनते थे. शहर के लोगों का नेकी की दीवार के पीछे का उद्देश्य भले ही नेक रहा हो. लेकिन इस उद्देश्य को कुछ लोगों ने खराब कर दिया है.

कूड़े की तरह जमा हो गया कपड़ा कुछ दिन पूर्व ही दिवाली का पर्व मनाया गया. हर घर में साफ सफाई हो रही थी और लोग अपने इस्तेमाल किए गए कपड़ों को नेकी की दीवार पर फेंक कर चले जा रहे हैं. उसमें ऐसे भी कपड़े हैं जो पहनने के लायक भी नहीं है. कपड़ों की तादाद इतनी ज्यादा हो गई है कि कूड़े का ढेर जैसा लग रहा है. आलम यह हो गया है कि अब अच्छे कपड़े भी बेकार हो रहे हैं.

रास्ते से गुजर रहे राहगीरों ने कहा कि लोग अक्सर यहां पर बड़ी तादाद में कपड़े डाल कर चले जाते हैं. कई कपड़े इस्तेमाल के लायक ही नहीं होते हैं जिसकी वजह से अच्छे कपड़े भी खराब कपड़ों में मिल जाते हैं. लोगों को चाहिए कि वह साफ-सुथरे कपड़े बांटे न कि ऐसे फेक कर चले जाएं. नेकी की दीवार का जो उद्देश्य है, उसे बरकरार रखना हम सब की जिम्मेदारी है.

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