कोरबा/पाली:- अंचल में दीपावली के बाद धान कटाई व ढुलाई का कार्य काफी तेजी से चल रहा है और ग्रामीण अब खेत व खलिहान में नजर आने लगे है तथा गांव की गलियां सुनसान हो चली है। किसान प्रयास में जुटे है कि जितनी जल्दी हो सके खेत की फसल खलिहान तक पहुँच जाए। इसके लिए धान की तेजी से कटाई के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी किसान चिंतित है। ग्रामीण इलाकों में धान की कटाई व ढुलाई का कार्य ज्यादातर पारंपरिक तरीके से किया जाता है। जिसमे मजदूरों के माध्यम से कटाई और ढुलाई कराकर बाड़ी में खरही बनाकर रखा जाता है। लेकिन वर्तमान में मजदूर नही मिलने से किसान घर- परिवार के साथ खेत- खलिहान में व्यस्त है। जिसमे प्राथमिक स्तर के स्कूली बच्चे भी शामिल है। एक और जहां महिलाएं धान कटाई तो पुरुष वर्ग उसे खलिहान तक लाने में लगे है। स्कूली बच्चो के धान ढुलाई कार्य मे लगे एक ऐसे ही परिदृश्य चैतमा के समीप माँगामार में देखने को मिला जहां अरुण कुमार आयम व उसका साथी हेमंत कुमार केरकेट्टा बीते रविवार छुट्टी के दिन अपने- अपने खेतों से पारंपरिक कांवड़ के माध्यम से धान की ढुलाई करते हुए खेती कार्य मे माता- पिता का हाथ बटा रहे थे। स्कूल की छुट्टी में बच्चे ज्यादातर खेलने- कूदने मे मस्त रहते है लेकिन अरुण व हेमंत जिस प्रकार अपने कंधे पर कांवड़ के माध्यम से धान का बीड़ा उठाए धान ढुलाई में परिवार को सहयोग दे रहे है, वह एक सकारात्मक सीख देती है।
वर्तमान में पूर्व की टूट रही कई परम्पराएं
पहले बीड़ा बांधने का कार्य धान की बाली निकालकर पैरा से रस्सी बनाकर किया जाता था। किंतु अब अधिकतर लोग प्लास्टिक की बोरियों को काटकर उसका उपयोग बीड़ा बांधने के लिए करते है। इसका एकमात्र कारण यह है कि लोग अब रस्सी बनाना नही जानते। साथ ही इस काम मे काफी समय लगता है। इसी प्रकार धान ढुलाई के लिए अब किसान ट्रेक्टर अथवा चार पहिया वाहन का उपयोग करते है, क्योंकि अब के समय मे मजदूर का टोटा बना रहता है तो वही वाहन से ढुलाई से समय की बचत भी होती है। मिंजाई कार्य भी बैलों की जगह ट्रेक्टर से होने लगा है।









